श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.10.6

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तपसा ह्येधमानेन विद्यया चात्मसंस्थया।

विवृद्धविज्ञानबलो न्यपाद् वायुं सहाम्भसा॥ ६

tapasā hyedhamānena vidyayā cātmasaṃsthayā|

vivṛddhavijñānabalo nyapād vāyuṃ sahāmbhasā|| 6

अर्थ

प्रबल तपस्या एवं हृदयमें स्थित आत्मज्ञानसे उनका विज्ञानबल बढ़ गया और उन्होंने जलके साथ वायुको पी लिया॥ ६॥

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