श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.1.12

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

पार्थांस्तु देवो भगवान्मुकुन्दो

गृहीतवान् सक्षितिदेवदेवः।

आस्ते स्वपुर्यां यदुदेवदेवो

विनिर्जिताशेषनृदेवदेवः ॥ १२

pārthāṃstu devo bhagavānmukundo

gṛhītavān sakṣitidevadevaḥ|

āste svapuryāṃ yadudevadevo

vinirjitāśeṣanṛdevadevaḥ || 12

अर्थ

आपको पता नहीं, भगवान् श्रीकृष्णने पाण्डवोंको अपना लिया है। वे यदुवीरोंके आराध्यदेव इस समय अपनी राजधानी द्वारकापुरीमें विराजमान हैं। उन्होंने पृथ्वीके सभी बड़े-बड़े राजाओंको अपने अधीन कर लिया है तथा ब्राह्मण और देवता भी उन्हींके पक्षमें हैं॥ १२॥

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