॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.1.10
यदोपहूतो भवनं प्रविष्टो
मन्त्राय पृष्टः किल पूर्वजेन।
अथाह तन्मन्त्रदृशां वरीयान्
यन्मन्त्रिणो वैदुरिकं वदन्ति॥ १०
yadopahūto bhavanaṃ praviṣṭo
mantrāya pṛṣṭaḥ kila pūrvajena|
athāha tanmantradṛśāṃ varīyān
yanmantriṇo vaidurikaṃ vadanti|| 10
अर्थ
फिर जब सलाहके लिये विदुरजीको बुलाया गया, तब मन्त्रियोंमें श्रेष्ठ विदुरजीने राज्यभवनमें जाकर बड़े भाई धृतराष्ट्रके पूछनेपर उन्हें वह सम्मति दी, जिसे नीति-शास्त्रके जाननेवाले पुरुष ‘विदुरनीति’ कहते हैं॥ १०॥