श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.9.17

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तद्दर्शनाह्लादपरिप्लुतान्तरो

हृष्यत्तनुः प्रेमभराश्रुलोचनः।

ननाम पादाम्बुजमस्य विश्‍वसृग्

यत् पारमहंस्येन पथाधिगम्यते॥ १७

taddarśanāhlādapariplutāntaro

hṛṣyattanuḥ premabharāśrulocanaḥ|

nanāma pādāmbujamasya viśvasṛg

yat pāramahaṃsyena pathādhigamyate|| 17

अर्थ

उनका दर्शन करते ही ब्रह्माजीका हृदय आनन्दके उद्रेकसे लबालब भर गया। शरीर पुलकित हो उठा, नेत्रोंमें प्रेमाश्रु छलक आये। ब्रह्माजीने भगवान्‌के उन चरणकमलोंमें, जो परमहंसोंके निवृत्तिमार्गसे प्राप्त हो सकते हैं, सिर झुकाकर प्रणाम किया॥ १७॥

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