श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.4.3

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

पप्रच्छ चेममेवार्थं यन्मां पृच्छथ सत्तमाः।

कृष्णानुभावश्रवणे श्रद्दधानो महामनाः॥ ३

papraccha cemamevārthaṃ yanmāṃ pṛcchatha sattamāḥ|

kṛṣṇānubhāvaśravaṇe śraddadhāno mahāmanāḥ|| 3

अर्थ

शौनकादि ऋषियो! महामनस्वी परीक्षित‍्ने अपनी मृत्युका निश्चित समय जान लिया था। इसलिये उन्होंने धर्म, अर्थ और कामसे सम्बन्ध रखनेवाले जितने भी कर्म थे, उनका संन्यास कर दिया। इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णमें सुदृढ़ आत्मभावको प्राप्त होकर बड़ी श्रद्धासे भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा सुननेके लिये उन्होंने श्रीशुकदेवजीसे यही प्रश्न किया, जिसे आपलोग मुझसे पूछ रहे हैं॥ ३-४॥✎ 1580

यह अर्थ श्लोक 3–4 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1580 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आप-लोग → आपलोग

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