परीक्षित्! वेदगर्भ स्वयम्भू ब्रह्माने नारदके प्रश्न करनेपर यही बात कही थी, जिसका स्वयं भगवान् नारायणने उन्हें उपदेश किया था (और वही मैं तुमसे कह रहा हूँ)॥ २५॥
एतदेवात्मभू राजन् नारदाय विपृच्छते।
वेदगर्भोऽभ्यधात् साक्षाद् यदाह हरिरात्मनः॥ २५
परीक्षित्! वेदगर्भ स्वयम्भू ब्रह्माने नारदके प्रश्न करनेपर यही बात कही थी, जिसका स्वयं भगवान् नारायणने उन्हें उपदेश किया था (और वही मैं तुमसे कह रहा हूँ)॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.4.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 198) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/4/25/
टिप्पणियाँ
३
प्रा० पा०—सर्वं यदाह हरिरीश्वरः।
(मुद्रित पृष्ठ 198)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1942 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): साक्षात् → साक्षाद्