श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.4.11

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

सूत उवाच

इत्युपामन्त्रितो राज्ञा गुणानुकथने हरेः।

हृषीकेशमनुस्मृत्य प्रतिवक्तुं प्रचक्रमे॥ ११

ityupāmantrito rājñā guṇānukathane hareḥ|

hṛṣīkeśamanusmṛtya prativaktuṃ pracakrame|| 11

अर्थ

सूतजी कहते हैं—जब राजा परीक्षित‍्ने भगवान्‌के गुणोंका वर्णन करनेके लिये उनसे इस प्रकार प्रार्थना की, तब श्रीशुकदेवजीने भगवान् श्रीकृष्णका बार-बार स्मरण करके अपना प्रवचन प्रारम्भ किया॥ ११॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें