सूतजी कहते हैं—जब राजा परीक्षित्ने भगवान्के गुणोंका वर्णन करनेके लिये उनसे इस प्रकार प्रार्थना की, तब श्रीशुकदेवजीने भगवान् श्रीकृष्णका बार-बार स्मरण करके अपना प्रवचन प्रारम्भ किया॥ ११॥
इत्युपामन्त्रितो राज्ञा गुणानुकथने हरेः।
हृषीकेशमनुस्मृत्य प्रतिवक्तुं प्रचक्रमे॥ ११
सूतजी कहते हैं—जब राजा परीक्षित्ने भगवान्के गुणोंका वर्णन करनेके लिये उनसे इस प्रकार प्रार्थना की, तब श्रीशुकदेवजीने भगवान् श्रीकृष्णका बार-बार स्मरण करके अपना प्रवचन प्रारम्भ किया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.4.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 196) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/4/11/