भगवन्मय श्रीशुकदेवजी भी जन्मसे ही भगवत्परायण हैं। ऐसे संतोंके सत्संगमें भगवान्के मंगलमय गुणोंकी दिव्य चर्चा अवश्य ही हुई होगी॥ १६॥✎ 127128
वैयासकिश्च भगवान् वासुदेवपरायणः।
उरुगायगुणोदाराः सतां स्युर्हि समागमे॥ १६
भगवन्मय श्रीशुकदेवजी भी जन्मसे ही भगवत्परायण हैं। ऐसे संतोंके सत्संगमें भगवान्के मंगलमय गुणोंकी दिव्य चर्चा अवश्य ही हुई होगी॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.3.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 194) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/3/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)