श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.10.33

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

एतद्भगवतो रूपं स्थूलं ते व्याहृतं मया।

मह्यादिभिश्चावरणैरष्टभिर्बहिरावृतम् ॥ ३३

etadbhagavato rūpaṃ sthūlaṃ te vyāhṛtaṃ mayā|

mahyādibhiścāvaraṇairaṣṭabhirbahirāvṛtam || 33

अर्थ

मैंने भगवान्‌के इस स्थूलरूपका वर्णन तुम्हें सुनाया है। यह बाहरकी ओरसे पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, अहंकार, महत्तत्त्व और प्रकृति—इन आठ आवरणोंसे घिरा हुआ है॥ ३३॥

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