॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.10.33
एतद्भगवतो रूपं स्थूलं ते व्याहृतं मया।
मह्यादिभिश्चावरणैरष्टभिर्बहिरावृतम् ॥ ३३
etadbhagavato rūpaṃ sthūlaṃ te vyāhṛtaṃ mayā|
mahyādibhiścāvaraṇairaṣṭabhirbahirāvṛtam || 33
अर्थ
मैंने भगवान्के इस स्थूलरूपका वर्णन तुम्हें सुनाया है। यह बाहरकी ओरसे पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, अहंकार, महत्तत्त्व और प्रकृति—इन आठ आवरणोंसे घिरा हुआ है॥ ३३॥