जब उन्होंने अपनी मायापर विचार करना चाहा, तब हृदयकी उत्पत्ति हुई। उससे मनरूप इन्द्रिय और मनसे उसका देवता चन्द्रमा तथा विषय, कामना और संकल्प प्रकट हुए॥ ३०॥
निदिध्यासोरात्ममायां हृदयं निरभिद्यत।
ततो मनस्ततश्चन्द्रः सङ्कल्पः काम एव च॥ ३०
जब उन्होंने अपनी मायापर विचार करना चाहा, तब हृदयकी उत्पत्ति हुई। उससे मनरूप इन्द्रिय और मनसे उसका देवता चन्द्रमा तथा विषय, कामना और संकल्प प्रकट हुए॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.10.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 231) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/10/30/