श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.10.11

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तास्ववात्सीत् स्वसृष्टासु सहस्रपरिवत्सरान्।

तेन नारायणो नाम यदापः पुरुषोद्भवाः॥ ११

tāsvavātsīt svasṛṣṭāsu sahasraparivatsarān|

tena nārāyaṇo nāma yadāpaḥ puruṣodbhavāḥ|| 11

अर्थ

विराट् पुरुषरूप ‘नर’ से उत्पन्‍न होनेके कारण ही जलका नाम ‘नार’ पड़ा और उस अपने उत्पन्‍न किये हुए ‘नार’ में वह पुरुष एक हजार वर्षोंतक रहा, इसीसे उसका नाम ‘नारायण’ हुआ॥ ११॥✎ 180

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #180 शब्दोंके बीचका स्थान: नारायणभगवान् की → नारायणभगवान्‌की

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