॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.8.15
बहूनि सन्ति नामानि रूपाणि च सुतस्य ते।
गुणकर्मानुरूपाणि तान्यहं वेद नो जनाः॥ १५
bahūni santi nāmāni rūpāṇi ca sutasya te|
guṇakarmānurūpāṇi tānyahaṃ veda no janāḥ|| 15
अर्थ
तुम्हारे पुत्रके और भी बहुत-से नाम हैं तथा रूप भी अनेक हैं। इसके जितने गुण हैं और जितने कर्म, उन सबके अनुसार अलग-अलग नाम पड़ जाते हैं। मैं तो उन नामोंको जानता हूँ, परन्तु संसारके साधारण लोग नहीं जानते॥ १५॥