श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

आसन् वर्णास्त्रयो ह्यस्य गृह्णतोऽनुयुगं तनूः।

शुक्लो रक्तस्तथा पीत इदानीं कृष्णतां गतः॥ १३

āsan varṇāstrayo hyasya gṛhṇato'nuyugaṃ tanūḥ|

śuklo raktastathā pīta idānīṃ kṛṣṇatāṃ gataḥ|| 13

अर्थ

और यह जो साँवला-साँवला है, यह प्रत्येक युगमें शरीर ग्रहण करता है। पिछले युगोंमें इसने क्रमशः श्‍वेत, रक्त और पीत—ये तीन विभिन्‍न रंग स्वीकार किये थे। अबकी यह कृष्णवर्ण हुआ है। इसलिये इसका नाम ‘कृष्ण’ होगा॥ १३॥

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