श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

नन्दस्य पत्‍नी कृतमज्जनादिकं

विप्रैः कृतस्वस्त्ययनं सुपूजितैः।

अन्‍नाद्यवासःस्रगभीष्टधेनुभिः

संजातनिद्राक्षमशीशयच्छनैः ॥ ५

nandasya patnī kṛtamajjanādikaṃ

vipraiḥ kṛtasvastyayanaṃ supūjitaiḥ|

annādyavāsaḥsragabhīṣṭadhenubhiḥ

saṃjātanidrākṣamaśīśayacchanaiḥ || 5

अर्थ

नन्दरानी यशोदाजीने ब्राह्मणोंका खूब पूजन-सम्मान किया। उन्हें अन्‍न, वस्त्र, माला, गाय आदि मुँहमाँगी वस्तुएँ दीं। जब यशोदाने उन ब्राह्मणोंद्वारा स्वस्तिवाचन कराकर स्वयं बालकके नहलाने आदिका कार्य सम्पन्‍न कर लिया, तब यह देखकरकि मेरे लल्लाके नेत्रोंमें नींद आ रही है, अपने पुत्रको धीरेसे शय्यापर सुला दिया॥ ५॥

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