॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.7.29
तमन्तरिक्षात् पतितं शिलायां
विशीर्णसर्वावयवं करालम्।
पुरं यथा रुद्रशरेण विद्धं
स्त्रियो रुदत्यो ददृशुः समेताः॥ २९
tamantarikṣāt patitaṃ śilāyāṃ
viśīrṇasarvāvayavaṃ karālam|
puraṃ yathā rudraśareṇa viddhaṃ
striyo rudatyo dadṛśuḥ sametāḥ|| 29
अर्थ
वहाँ जो स्त्रियाँ इकट्ठी होकर रो रही थीं, उन्होंने देखा कि वह विकराल दैत्य आकाशसे एक चट्टानपर गिर पड़ा और उसका एक-एक अंग चकनाचूर हो गया—ठीक वैसे ही, जैसे भगवान् शंकरके बाणोंसे आहत हो त्रिपुरासुर गिरकर चूर-चूर हो गया था॥ २९॥