श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सा खेचर्येकदोपेत्य पूतना नन्दगोकुलम्।

योषित्वा माययाऽऽत्मानं प्राविशत् कामचारिणी॥ ४

sā khecaryekadopetya pūtanā nandagokulam|

yoṣitvā māyayā''tmānaṃ prāviśat kāmacāriṇī|| 4

अर्थ

वह पूतना आकाशमार्गसे चल सकती थी और अपनी इच्छाके अनुसार रूप भी बना लेती थी। एक दिन नन्दबाबाके गोकुलके पास आकर उसने मायासे अपनेको एक सुन्दरी युवती बना लिया और गोकुलके भीतर घुस गयी॥ ४॥✎ 1654

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1654 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कुच-कलश → कुचकलश

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