श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.5.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

गोपान् गोकुलरक्षायां निरूप्य मथुरां गतः।

नन्दः कंसस्य वार्षिक्यं करं दातुं कुरूद्वह॥ १९

gopān gokularakṣāyāṃ nirūpya mathurāṃ gataḥ|

nandaḥ kaṃsasya vārṣikyaṃ karaṃ dātuṃ kurūdvaha|| 19

अर्थ

परीक्षित्! कुछ दिनोंके बाद नन्दबाबाने गोकुलकी रक्षाका भार तो दूसरे गोपोंको सौंप दिया और वे स्वयं कंसका वार्षिक कर चुकानेके लिये मथुरा चले गये॥ १९॥

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