॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.5.14
गोपाः परस्परं हृष्टा दधिक्षीरघृताम्बुभिः।
आसिञ्चन्तो विलिम्पन्तो नवनीतैश्च चिक्षिपुः॥ १४
gopāḥ parasparaṃ hṛṣṭā dadhikṣīraghṛtāmbubhiḥ|
āsiñcanto vilimpanto navanītaiśca cikṣipuḥ|| 14
अर्थ
आनन्दसे मतवाले होकर गोपगण एक-दूसरेपर दही, दूध, घी और पानी उड़ेलने लगे। एक-दूसरेके मुँहपर मक्खन मलने लगे और मक्खन फेंक-फेंककर आनन्दोत्सव मनाने लगे॥ १४॥