नन्दबाबाके घर जाकर वे नवजात शिशुको आशीर्वाद देतीं ‘यह चिरजीवी हो, भगवन्! इसकी रक्षा करो।’ और लोगोंपर हल्दी-तेलसे मिला हुआ पानी छिड़क देतीं तथा ऊँचे स्वरसे मंगलगान करती थीं॥ १२॥
ता आशिषः प्रयुंजानाश्चिरं पाहीति बालके।
हरिद्राचूर्णतैलाद्भिः सिंचन्त्योऽजनमुज्जगुः॥ १२
नन्दबाबाके घर जाकर वे नवजात शिशुको आशीर्वाद देतीं ‘यह चिरजीवी हो, भगवन्! इसकी रक्षा करो।’ और लोगोंपर हल्दी-तेलसे मिला हुआ पानी छिड़क देतीं तथा ऊँचे स्वरसे मंगलगान करती थीं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.5.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 152) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/5/12/