श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.49.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 49 · अथैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

कृष्ण कृष्ण महायोगिन् विश्‍वात्मन् विश्‍वभावन।

प्रपन्‍नां पाहि गोविन्द शिशुभिश्‍चावसीदतीम्॥ ११

kṛṣṇa kṛṣṇa mahāyogin viśvātman viśvabhāvana|

prapannāṃ pāhi govinda śiśubhiścāvasīdatīm|| 11

अर्थ

(श्रीकृष्णको अपने सामने समझकर कुन्ती कहने लगीं—) ‘सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! तुम महायोगी हो, विश्‍वात्मा हो और तुम सारे विश्‍वके जीवनदाता हो। गोविन्द! मैं अपने बच्चोंके साथ दुःख-पर-दुःख भोग रही हूँ। तुम्हारी शरणमें आयी हूँ। मेरी रक्षा करो। मेरे बच्चोंको बचाओ॥ ११॥✎ 2106

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2106 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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