‘प्रियतम! आप कुछ दिन यहीं रहकर मेरे साथ क्रीडा कीजिये। क्योंकि हे कमलनयन! मुझसे आपका साथ नहीं छोड़ा जाता’॥ ९॥✎ 1679
आहोष्यतामिह प्रेष्ठ दिनानि कतिचिन्मया।
रमस्व नोत्सहे त्यक्तुं संगं तेऽम्बुरुहेक्षण॥ ९
‘प्रियतम! आप कुछ दिन यहीं रहकर मेरे साथ क्रीडा कीजिये। क्योंकि हे कमलनयन! मुझसे आपका साथ नहीं छोड़ा जाता’॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.48.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 436) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/48/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)