॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.47.27
सर्वात्मभावोऽधिकृतो भवतीनामधोक्षजे।
विरहेण महाभागा महान् मेऽनुग्रहः कृतः॥ २७
sarvātmabhāvo'dhikṛto bhavatīnāmadhokṣaje|
viraheṇa mahābhāgā mahān me'nugrahaḥ kṛtaḥ|| 27
अर्थ
महाभाग्यवती गोपियो! भगवान् श्रीकृष्णके वियोगसे तुमने उन इन्द्रियातीत परमात्माके प्रति वह भाव प्राप्त कर लिया है, जो सभी वस्तुओंके रूपमें उनका दर्शन कराता है। तुमलोगोंका वह भाव मेरे सामने भी प्रकट हुआ, यह मेरे ऊपर तुम देवियोंकी बड़ी ही दया है॥ २७॥