॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.47.24
दानव्रततपोहोमजपस्वाध्यायसंयमैः ।
श्रेयोभिर्विविधैश्चान्यैः कृष्णे भक्तिर्हि साध्यते॥ २४
dānavratatapohomajapasvādhyāyasaṃyamaiḥ |
śreyobhirvividhaiścānyaiḥ kṛṣṇe bhaktirhi sādhyate|| 24
अर्थ
दान, व्रत, तप, होम, जप, वेदाध्ययन, ध्यान, धारणा, समाधि और कल्याणके अन्य विविध साधनोंके द्वारा भगवान्की भक्ति प्राप्त हो, यही प्रयत्न किया जाता है॥ २४॥