श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

वासितार्थेऽभियुध्यद्भिर्नादितं शुष्मिभिर्वृषैः।

धावन्तीभिश्‍च वास्राभिरूधोभारैः स्ववत्सकान्॥ ९

vāsitārthe'bhiyudhyadbhirnāditaṃ śuṣmibhirvṛṣaiḥ|

dhāvantībhiśca vāsrābhirūdhobhāraiḥ svavatsakān|| 9

अर्थ

व्रजभूमिमें ऋतुमती गौओंके लिये मतवाले साँड़ आपसमें लड़ रहे थे। उनकी गर्जनासे सारा व्रज गूँज रहा था। थोड़े दिनोंकी ब्यायी हुई गौएँ अपने थनोंके भारी भारसे दबी होनेपर भी अपने-अपने बछड़ोंकी ओर दौड़ रही थीं॥ ९॥

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