श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

तालत्रयं महासारं धनुर्यष्टिमिवेभराट्।

बभंजैकेन हस्तेन सप्ताहमदधाद् गिरिम्॥ २५

tālatrayaṃ mahāsāraṃ dhanuryaṣṭimivebharāṭ|

babhaṃjaikena hastena saptāhamadadhād girim|| 25

अर्थ

उन्होंने तीन ताल लंबे और अत्यन्त दृढ़ धनुषको वैसे ही तोड़ डाला, जैसे कोई हाथी किसी छड़ीको तोड़ डाले। हमारे प्यारे श्रीकृष्णने एक हाथसे सात दिनोंतक गिरिराजको उठाये रखा था॥ २५॥

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