श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

दिष्ट्या कंसो हतः पापः सानुगः स्वेन पाप्मना।

साधूनां धर्मशीलानां यदूनां द्वेष्टि यः सदा॥ १७

diṣṭyā kaṃso hataḥ pāpaḥ sānugaḥ svena pāpmanā|

sādhūnāṃ dharmaśīlānāṃ yadūnāṃ dveṣṭi yaḥ sadā|| 17

अर्थ

यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि अपने पापोंके फलस्वरूप पापी कंस अपने अनुयायियोंके साथ मारा गया। क्योंकि स्वभावसे ही धार्मिक परम साधु यदुवंशियोंसे वह सदा द्वेष करता था॥ १७॥

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