गोपी और गोप सुन्दर-सुन्दर वस्त्र तथा गहनोंसे सज-धजकर श्रीकृष्ण तथा बलरामजीके मंगलमय चरित्रोंका गान कर रहे थे और इस प्रकार व्रजकी शोभा और भी बढ़ गयी थी॥ ११॥
गायन्तीभिश्च कर्माणि शुभानि बलकृष्णयोः।
स्वलंकृताभिर्गोपीभिर्गोपैश्च सुविराजितम्॥ ११
गोपी और गोप सुन्दर-सुन्दर वस्त्र तथा गहनोंसे सज-धजकर श्रीकृष्ण तथा बलरामजीके मंगलमय चरित्रोंका गान कर रहे थे और इस प्रकार व्रजकी शोभा और भी बढ़ गयी थी॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.46.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 416) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/46/11/