॥ श्रीहरिः ॥
आस्ते तेनाहृतो नूनं तच्छ्रुत्वा सत्वरं प्रभुः।
जलमाविश्य तं हत्वा नापश्यदुदरेऽर्भकम्॥ ४१
āste tenāhṛto nūnaṃ tacchrutvā satvaraṃ prabhuḥ|
jalamāviśya taṃ hatvā nāpaśyadudare'rbhakam|| 41
अर्थ
समुद्रकी बात सुनकर भगवान् तुरंत ही जलमें जा घुसे और शंखासुरको मार डाला। परन्तु वह बालक उसके पेटमें नहीं मिला॥ ४१॥
आस्ते तेनाहृतो नूनं तच्छ्रुत्वा सत्वरं प्रभुः।
जलमाविश्य तं हत्वा नापश्यदुदरेऽर्भकम्॥ ४१
समुद्रकी बात सुनकर भगवान् तुरंत ही जलमें जा घुसे और शंखासुरको मार डाला। परन्तु वह बालक उसके पेटमें नहीं मिला॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 413) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/45/41/