श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

तत्र प्रवयसोऽप्यासन् युवानोऽतिबलौजसः।

पिबन्तोऽक्षैर्मुकुन्दस्य मुखाम्बुजसुधां मुहुः॥ १९

tatra pravayaso'pyāsan yuvāno'tibalaujasaḥ|

pibanto'kṣairmukundasya mukhāmbujasudhāṃ muhuḥ|| 19

अर्थ

मथुराके वृद्ध पुरुष भी युवकोंके समान अत्यन्त बलवान् और उत्साही हो गये थे; क्योंकि वे अपने नेत्रोंके दोनोंसे बारंबार भगवान्‌के मुखारविन्दका अमृतमय मकरन्द-रस पान करते रहते थे॥ १९॥

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