मथुराके वृद्ध पुरुष भी युवकोंके समान अत्यन्त बलवान् और उत्साही हो गये थे; क्योंकि वे अपने नेत्रोंके दोनोंसे बारंबार भगवान्के मुखारविन्दका अमृतमय मकरन्द-रस पान करते रहते थे॥ १९॥
तत्र प्रवयसोऽप्यासन् युवानोऽतिबलौजसः।
पिबन्तोऽक्षैर्मुकुन्दस्य मुखाम्बुजसुधां मुहुः॥ १९
मथुराके वृद्ध पुरुष भी युवकोंके समान अत्यन्त बलवान् और उत्साही हो गये थे; क्योंकि वे अपने नेत्रोंके दोनोंसे बारंबार भगवान्के मुखारविन्दका अमृतमय मकरन्द-रस पान करते रहते थे॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 410) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/45/19/