श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.44.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 44 · अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

चाणूर, मुष्टिक आदि पहलवानोंका तथा कंसका उद्धार

श्रीशुक उवाच

एवं चर्चितसंकल्पो भगवान् मधुसूदनः।

आससादाथ चाणूरं मुष्टिकं रोहिणीसुतः॥ १

evaṃ carcitasaṃkalpo bhagavān madhusūdanaḥ|

āsasādātha cāṇūraṃ muṣṭikaṃ rohiṇīsutaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने चाणूर आदिके वधका निश्‍चित संकल्प कर लिया। जोड़ बद दिये जानेपर श्रीकृष्ण चाणूरसे और बलरामजी मुष्टिकसे जा भिड़े॥ १॥

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