श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

अयं चास्याग्रजः श्रीमान् रामः कमललोचनः।

प्रलम्बो निहतो येन वत्सको ये बकादयः॥ ३०

ayaṃ cāsyāgrajaḥ śrīmān rāmaḥ kamalalocanaḥ|

pralambo nihato yena vatsako ye bakādayaḥ|| 30

अर्थ

ये दूसरे इन्हीं श्यामसुन्दरके बड़े भाई कमलनयन श्रीबलरामजी हैं। हमने किसी-किसीके मुँहसे ऐसा सुना है कि इन्होंने ही प्रलम्बासुर, वत्सासुर और बकासुर आदिको मारा है’॥ ३०॥

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