उसके गिर जानेपर भगवान्ने सिंहके समान खेल-ही-खेलमें उसे पैरोंसे दबाकर उसके दाँत उखाड़ लिये और उन्हींसे हाथी और महावतोंका काम तमाम कर दिया॥ १४॥
पतितस्य पदाऽऽक्रम्य मृगेन्द्र इव लीलया।
दन्तमुत्पाट्य तेनेभं हस्तिपांश्चाहनद्धरिः॥ १४
उसके गिर जानेपर भगवान्ने सिंहके समान खेल-ही-खेलमें उसे पैरोंसे दबाकर उसके दाँत उखाड़ लिये और उन्हींसे हाथी और महावतोंका काम तमाम कर दिया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 398) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/43/14/