॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.42.37
चाणूरो मुष्टिकः कूटः शलस्तोशल एव च।
त आसेदुरुपस्थानं वल्गुवाद्यप्रहर्षिताः॥ ३७
cāṇūro muṣṭikaḥ kūṭaḥ śalastośala eva ca|
ta āsedurupasthānaṃ valguvādyapraharṣitāḥ|| 37
अर्थ
चाणूर, मुष्टिक, कूट, शल और तोशल आदि प्रधान-प्रधान पहलवान बाजोंकी सुमधुर ध्वनिसे उत्साहित होकर अखाड़ेमें आ-आकर बैठ गये॥ ३७॥