tejaḥ prāgalbhyaṃ rūpaṃ ca menire vibudhottamau|| 22
अर्थ
जब नगरनिवासियोंने दोनों भाइयोंके इस अद्भुत पराक्रमकी बात सुनी और उनके तेज, साहस तथा अनुपम रूपको देखा तब उन्होंने यही निश्चय किया कि हो-न-हो ये दोनों कोई श्रेष्ठ देवता हैं॥ २२॥
तयोस्तदद्भुतं वीर्यं निशाम्य पुरवासिनः।
तेजः प्रागल्भ्यं रूपं च मेनिरे विबुधोत्तमौ॥ २२
जब नगरनिवासियोंने दोनों भाइयोंके इस अद्भुत पराक्रमकी बात सुनी और उनके तेज, साहस तथा अनुपम रूपको देखा तब उन्होंने यही निश्चय किया कि हो-न-हो ये दोनों कोई श्रेष्ठ देवता हैं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 395) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/22/