॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.42.17
करेण वामेन सलीलमुद्धृतं
सज्यं च कृत्वा निमिषेण पश्यताम्।
नृणां विकृष्य प्रबभंज मध्यतो
यथेक्षुदण्डं मदकर्युरुक्रमः॥ १७
kareṇa vāmena salīlamuddhṛtaṃ
sajyaṃ ca kṛtvā nimiṣeṇa paśyatām|
nṛṇāṃ vikṛṣya prababhaṃja madhyato
yathekṣudaṇḍaṃ madakaryurukramaḥ|| 17
अर्थ
उन्होंने सबके देखते-देखते उस धनुषको बायें हाथसे उठाया, उसपर डोरी चढ़ायी और एक क्षणमें खींचकर बीचो-बीचसे उसी प्रकार उसके दो टुकड़े कर डाले, जैसे बहुत बलवान् मतवाला हाथी खेल-ही-खेलमें ईखको तोड़ डालता है॥ १७॥