मथुराकी नारियाँ अपने-अपने महलोंकी अटारियोंपर चढ़कर बलराम और श्रीकृष्णपर पुष्पोंकी वर्षा करने लगीं। उस समय उन स्त्रियोंके मुखकमल प्रेमके आवेगसे खिल रहे थे॥ २९॥✎ 1930
प्रासादशिखरारूढाः प्रीत्युत्फुल्लमुखाम्बुजाः।
अभ्यवर्षन् सौमनस्यैः प्रमदा बलकेशवौ॥ २९
मथुराकी नारियाँ अपने-अपने महलोंकी अटारियोंपर चढ़कर बलराम और श्रीकृष्णपर पुष्पोंकी वर्षा करने लगीं। उस समय उन स्त्रियोंके मुखकमल प्रेमके आवेगसे खिल रहे थे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 389) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1930 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): मत-वाले → मतवाले