श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्के इस प्रकार कहनेपर अक्रूरजी कुछ अनमने-से हो गये। उन्होंने पुरीमें प्रवेश करके कंससे श्रीकृष्ण और बलरामके ले आनेका समाचार निवेदन किया और फिर अपने घर गये॥ १८॥
एवमुक्तो भगवता सोऽक्रूरो विमना इव।
पुरीं प्रविष्टः कंसाय कर्मावेद्य गृहं ययौ॥ १८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्के इस प्रकार कहनेपर अक्रूरजी कुछ अनमने-से हो गये। उन्होंने पुरीमें प्रवेश करके कंससे श्रीकृष्ण और बलरामके ले आनेका समाचार निवेदन किया और फिर अपने घर गये॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 387) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/18/