यजन्ति त्वन्मयास्त्वां वै बहुमूर्त्येकमूर्तिकम्॥ ७
anye ca saṃskṛtātmāno vidhinābhihitena te|
yajanti tvanmayāstvāṃ vai bahumūrtyekamūrtikam|| 7
अर्थ
और भी बहुत-से संस्कार-सम्पन्न अथवा शुद्धचित्त वैष्णवजन आपकी बतलायी हुई पांचरात्र आदि विधियोंसे तन्मय होकर आपके चतुर्व्यूह आदि अनेक और नारायणरूप एक स्वरूपकी पूजा करते हैं॥ ७॥
अन्ये च संस्कृतात्मानो विधिनाभिहितेन ते।
यजन्ति त्वन्मयास्त्वां वै बहुमूर्त्येकमूर्तिकम्॥ ७
और भी बहुत-से संस्कार-सम्पन्न अथवा शुद्धचित्त वैष्णवजन आपकी बतलायी हुई पांचरात्र आदि विधियोंसे तन्मय होकर आपके चतुर्व्यूह आदि अनेक और नारायणरूप एक स्वरूपकी पूजा करते हैं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.40.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 382) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/40/7/