॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.39.51
सुमहार्हमणिव्रातकिरीटकटकांगदैः ।
कटिसूत्रब्रह्मसूत्रहारनूपुरकुण्डलैः ॥ ५१
sumahārhamaṇivrātakirīṭakaṭakāṃgadaiḥ |
kaṭisūtrabrahmasūtrahāranūpurakuṇḍalaiḥ || 51
अर्थ
अत्यन्त बहुमूल्य मणियोंसे जड़ा हुआ मुकुट, कड़े, बाजूबंद, करधनी, हार, नूपुर और कुण्डलोंसे तथा यज्ञोपवीतसे वह दिव्य मूर्ति अलंकृत हो रही है। एक हाथमें पद्म शोभा पा रहा है और शेष तीन हाथोंमें शंख, चक्र और गदा, वक्षःस्थलपर श्रीवत्सका चिह्न, गलेमें कौस्तुभमणि और वनमाला लटक रही है॥ ५१-५२॥