परीक्षित्! जब गोपियोंने सुना कि हमारे मनमोहन श्यामसुन्दर और गौरसुन्दर बलरामजीको मथुरा ले जानेके लिये अक्रूरजी व्रजमें आये हैं तब उनके हृदयमें बड़ी व्यथा हुई। वे व्याकुल हो गयीं॥ १३॥
गोप्यस्तास्तदुपश्रुत्य बभूवुर्व्यथिता भृशम्।
रामकृष्णौ पुरीं नेतुमक्रूरं व्रजमागतम्॥ १३
परीक्षित्! जब गोपियोंने सुना कि हमारे मनमोहन श्यामसुन्दर और गौरसुन्दर बलरामजीको मथुरा ले जानेके लिये अक्रूरजी व्रजमें आये हैं तब उनके हृदयमें बड़ी व्यथा हुई। वे व्याकुल हो गयीं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.39.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 374) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/39/13/