श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.38.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 38 · अथाष्टात्रिंशोऽध्यायः

ददर्श कृष्णं रामं च व्रजे गोदोहनं गतौ।

पीतनीलाम्बरधरौ शरदम्बुरुहेक्षणौ॥ २८

dadarśa kṛṣṇaṃ rāmaṃ ca vraje godohanaṃ gatau|

pītanīlāmbaradharau śaradamburuhekṣaṇau|| 28

अर्थ

व्रजमें पहुँचकर अक्रूरजीने श्रीकृष्ण और बलराम दोनों भाइयोंको गाय दुहनेके स्थानमें विराजमान देखा। श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण पीताम्बर धारण किये हुए थे और गौरसुन्दर बलराम नीलाम्बर। उनके नेत्र शरत्कालीन कमलके समान खिले हुए थे॥ २८॥

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