॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.37.31
तस्य तत् कर्म विज्ञाय कृष्णः शरणदः सताम्।
गोपान् नयन्तं जग्राह वृकं हरिरिवौजसा॥ ३१
tasya tat karma vijñāya kṛṣṇaḥ śaraṇadaḥ satām|
gopān nayantaṃ jagrāha vṛkaṃ haririvaujasā|| 31
अर्थ
भक्तवत्सल भगवान् उसकी यह करतूत जान गये। जिस समय वह ग्वालबालोंको लिये जा रहा था, उसी समय उन्होंने, जैसे सिंह भेड़ियेको दबोच ले उसी प्रकार, उसे धर दबाया॥ ३१॥✎ 2095