श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

घातयिष्य इहानीतौ कालकल्पेन हस्तिना।

यदि मुक्तौ ततो मल्लैर्घातये वैद्युतोपमैः॥ ३२

ghātayiṣya ihānītau kālakalpena hastinā|

yadi muktau tato mallairghātaye vaidyutopamaiḥ|| 32

अर्थ

यहाँ आनेपर मैं उन्हें अपने कालके समान कुवलयापीड हाथीसे मरवा डालूँगा। यदि वे कदाचित् उस हाथीसे बच गये, तो मैं अपने वज्रके समान मजबूत और फुर्तीले पहलवान मुष्टिक-चाणूर आदिसे उन्हें मरवा डालूँगा॥ ३२॥

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