श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

आरभ्यतां धनुर्यागश्‍चतुर्दश्यां यथाविधि।

विशसन्तु पशून् मेध्यान् भूतराजाय मीढुषे॥ २६

ārabhyatāṃ dhanuryāgaścaturdaśyāṃ yathāvidhi|

viśasantu paśūn medhyān bhūtarājāya mīḍhuṣe|| 26

अर्थ

इसी चतुर्दशीको विधिपूर्वक धनुषयज्ञ प्रारम्भ कर दो और उसकी सफलताके लिये वरदानी भूतनाथ भैरवको बहुत-से पवित्र पशुओंकी बलि चढ़ाओ॥ २६॥

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