भगवान्के श्रीचरणोंका स्पर्श होते ही अजगरके सारे अशुभ भस्म हो गये और वह उसी क्षण अजगरका शरीर छोड़कर विद्याधरार्चित सर्वांगसुन्दर रूपवान् बन गया॥ ९॥✎ 16702092
स वै भगवतः श्रीमत्पादस्पर्शहताशुभः।
भेजे सर्पवपुर्हित्वा रूपं विद्याधरार्चितम्॥ ९
भगवान्के श्रीचरणोंका स्पर्श होते ही अजगरके सारे अशुभ भस्म हो गये और वह उसी क्षण अजगरका शरीर छोड़कर विद्याधरार्चित सर्वांगसुन्दर रूपवान् बन गया॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.34.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 347) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/34/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)