इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण शंखचूडको मारकर और वह चमकीली मणि लेकर लौट आये तथा सब गोपियोंके सामने ही उन्होंने बड़े प्रेमसे वह मणि बड़े भाई बलरामजीको दे दी॥ ३२॥
शंखचूडं निहत्यैवं मणिमादाय भास्वरम्।
अग्रजायाददात् प्रीत्या पश्यन्तीनां च योषिताम्॥ ३२
इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण शंखचूडको मारकर और वह चमकीली मणि लेकर लौट आये तथा सब गोपियोंके सामने ही उन्होंने बड़े प्रेमसे वह मणि बड़े भाई बलरामजीको दे दी॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.34.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 350) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/34/32/