श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.33.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 33 · अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः

काचिद् रासपरिश्रान्ता पार्श्‍वस्थस्य गदाभृतः।

जग्राह बाहुना स्कन्धं श्‍लथद्वलयमल्लिका॥ ११

kācid rāsapariśrāntā pārśvasthasya gadābhṛtaḥ|

jagrāha bāhunā skandhaṃ ślathadvalayamallikā|| 11

अर्थ

एक गोपी नृत्य करते-करते थक गयी। उसकी कलाइयोंसे कंगन और चोटियोंसे बेलाके फूल खिसकने लगे। तब उसने अपने बगलमें ही खड़े मुरलीमनोहर श्यामसुन्दरके कंधेको अपनी बाँहसे कसकर पकड़ लिया॥ ११॥✎ 2090

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