॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.30.9
चूतप्रियालपनसासनकोविदार-
जम्ब्वर्कबिल्वबकुलाम्रकदम्बनीपाः।
येऽन्ये परार्थभवका यमुनोपकूलाः
शंसन्तु कृष्णपदवीं रहितात्मनां नः॥ ९
cūtapriyālapanasāsanakovidāra-
jambvarkabilvabakulāmrakadambanīpāḥ|
ye'nye parārthabhavakā yamunopakūlāḥ
śaṃsantu kṛṣṇapadavīṃ rahitātmanāṃ naḥ|| 9
अर्थ
‘रसाल, प्रियाल, कटहल, पीतशाल, कचनार, जामुन, आक, बेल, मौलसिरी, आम, कदम्ब और नीम तथा अन्यान्य यमुनाके तटपर विराजमान सुखी तरुवरो! तुम्हारा जन्म-जीवन केवल परोपकारके लिये है। श्रीकृष्णके बिना हमारा जीवन सूना हो रहा है। हम बेहोश हो रही हैं। तुम हमें उन्हें पानेका मार्ग बता दो’॥ ९॥