श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.45

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

पुनः पुलिनमागत्य कालिन्द्याः कृष्णभावनाः।

समवेता जगुः कृष्णं तदागमनकांक्षिताः॥ ४५

punaḥ pulinamāgatya kālindyāḥ kṛṣṇabhāvanāḥ|

samavetā jaguḥ kṛṣṇaṃ tadāgamanakāṃkṣitāḥ|| 45

अर्थ

गोपियोंका रोम-रोम इस बातकी प्रतीक्षा और आकांक्षा कर रहा था कि जल्दी-से-जल्दी श्रीकृष्ण आयें। श्रीकृष्णकी ही भावनामें डूबी हुई गोपियाँ यमुनाजीके पावन पुलिनपर—रमणरेतीमें लौट आयीं और एक साथ मिलकर श्रीकृष्णके गुणोंका गान करने लगीं॥ ४५॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे
रासक्रीडायां कृष्णान्वेषणं नाम त्रिंशोऽध्यायः ॥ ३०॥

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