॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.30.25
पदानि व्यक्तमेतानि नन्दसूनोर्महात्मनः।
लक्ष्यन्ते हि ध्वजाम्भोजवज्रांकुशयवादिभिः॥ २५
padāni vyaktametāni nandasūnormahātmanaḥ|
lakṣyante hi dhvajāmbhojavajrāṃkuśayavādibhiḥ|| 25
अर्थ
वे आपसमें कहने लगीं—‘अवश्य ही ये चरणचिह्न उदारशिरोमणि नन्दनन्दन श्यामसुन्दरके हैं; क्योंकि इनमें ध्वजा, कमल, वज्र, अंकुश और जौ आदिके चिह्न स्पष्ट ही दीख रहे हैं’॥ २५॥